17 वा श्री गुरु नाभादास संत सम्मेलन में श्री गुरु नाभादास जयकारों से गूंजा हल्का भोआ गोस्वामी श्री गुरु नाभादास गरीब महाशा परिवार में जन्म लेकर भी भारत में उच्च कोटि संतों में अपना नाम दर्ज करवाना महाशा समाज के लिए गर्व की बात है गोस्वामी श्री गुरु नाभादास शक्ति संत सम्मेलन प्रबंधक कमेटी हल्का भोआ के प्रधान श्री राकेश माजरा , स्मीति के चीफ ऑर्गेनाइजर रिटायर्ड प्रिंसिपल डॉक्टर पुरुषोत्तम भजूरा जी की अध्यक्षता में श्री गुरु नाभादास शक्ति संत सम्मेलन गोल्डन पैलेस गांव सिहोडा हल्का भोआ में करवाया गया जिसमें मुख्य मेहमान महामंडलेश्वर 1008 श्री श्री बंसी दास महाराज जी महंत दिकन दास जगन्नाथ पुरी, महंत गिरधर गोपाल दास श्री गलता धाम जयपुर महंत श्री विनोद दास वृंदावन महंत किशोरी दास अयोध्या धाम महंत श्री सांवरिया दास मुख्य मेहमान रूप में शामिल हुए संत सम्मेलन में मुख्य मेहमान महामंडलेश्वर 1008 श्री श्री महंत बंसीदास महाराज जी ने श्री भक्तमाल ग्रंथ की महिमा और श्री गुरु नाभादास जी के जीवन पर प्रकाश डाला उन्होंने अपने प्रवचनों में बताया कि संत नाभादास महाशा गरीब परिवार में जन्म लेकर भी संतों के आशीर्वाद से उच्च कोटि संतों में अपना नाम दर्ज करवाया और नाभादास जी का बचपन का नाम नारायण दास था जब उन्होंने समुद्र में डूबता जहाज को किनारे लगाया और अपने गुरु की नाभि की बात पहचान कर उसे पार लगाया उस समय उनका नाम नारायण दास के साथ-साथ नाभादास नाम से जानने लगे संत नाभादास जी ने 1585 ईस्वी में श्री गलता धाम में श्री भक्तमाल ग्रंथ की रचना की इस धार्मिक ग्रंथ में चार युगों के संतो भक्तों का चरित्र दर्ज किया इन संतों की बाणी को पूरे भारत देश में सुनने के लिए श्री भक्तमाल ग्रंथ का पाठ संतों महंतों के द्वारा किया जाता है और संतों के उपदेश से आज भारत के लोग प्रेम एकता भाईचारे में रहते हैं राकेश माजरा जी और रिटायर्ड प्रिंसिपल डॉक्टर पुरुषोत्तम भजूरा जी ने संयुक्त रूप में आई हुई संगत को अपील की गई कि अपने बच्चों को उच्च शिक्षा नशा मुक्ति संस्कार प्राप्त करवा कर भारत देश में महाशा समाज का नाम रोशन करें श्री गुरु नाभादास जी का उपदेश प्रेम एकता भाईचारा में रहने का भारत देश की तरक्की के लिए सहयोग करें इस संत सम्मेलन में सुबह हवन यज्ञ झंडा पूजन और अंत में विशाल भंडारा करवाया गया इस संत सम्मेलन में धार्मिक सामाजिक राजनीतिक संस्थाओं के प्रमुख शख्सियत शामिल हुए थे इस समय पर महंत सांवरिया दास राकेश माजरा सुरेंद्र कुमार राजेश भारती डॉक्टर बलराज मनजीत कुंडा नरेश गरौटा सरबजीत अश्विनी, गुरुदेव, पवन कुमार प्रवीण राज मल्होत्रा शिवचक कमलेश कमलेश और अपने सरबजीत सरबजीत सरपंच, सरबजीत कौर, हंसराज श्याम सुदर्शन बिंदु बाबा योगा बाबा, सुरेंद्र कुमार तारागढ़ चेतराम दर्शनकुमार करणवीर सेवाड़ा समूह संगठन


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